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साहब इतने मेहरबानी क्यों...शिवाय हॉस्पिटल पर जुर्माना तो बनता है,पर इससे भी परहेज कर रहा विभाग….!
ये तो गलत है न

कोरबा। नियमों को दरकिनार कर बिना संचालन अनुमति प्राप्त किये ही गैर लाइसेंसी शिवाय हॉस्पिटल के संचालन पर अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने कोई एक्शन नहीं लिया है। यह बड़ा ही संदेहास्पद विषय स्वास्थ्य विभाग के लिए बन गया है जब एक तरफ उनके द्वारा कहा जाता है कि चिकित्सा सेवा देने वाले चिकित्सकों का नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीयन होना अनिवार्य है तो दूसरी ओर वह इस बारे में कुछ नहीं कहते जबकि बिना अनुमति के ही अस्पताल का संचालन हो रहा है।

नया बस स्टैंड के निकट बिना लाइसेंस प्राप्ति के ही 5 मार्च 2026 से इस अस्पताल ने अपना ओपीडी प्रारंभ कर लिया है और औपचारिक उद्घाटन 7 मार्च को प्रदेश के श्रम मंत्री के हाथों कराया गया। यहां स्वास्थ्य विभाग के नियम-कायदे और नर्सिंग होम एक्ट का उल्लंघन के मामले में कार्रवाई अस्पताल की दहलीज तक आकर रुक जा रही है। अस्पताल प्रबंधन से जुड़े पार्टनर यह कहते नहीं थक रहे कि 100 बिस्तर के इस अस्पताल में हमने अभी 10 बिस्तर ही शुरू किया है, तो क्या इनके लिए पहले 10 फिर 90 बिस्तर की अनुमति मिलेगी..? जबकि आवेदन 100 बिस्तरों की अनुमति के लिए है। ओपीडी शुरू करने के साथ ECG व अन्य जांच भी अनुशंसित कर रहे हैं तो भला उस नियम के क्या मायने,जिसकी दुहाई दी जाती है कि- बिना अनुमति/ बिना लायसेंस अस्पताल में चिकित्सा सेवाएं नहीं दी सकती।जिला प्रशासन की बुधवार 11 मार्च को जारी प्रेस विज्ञप्ति इस प्रकार है- कोरबा जिले में विभिन्न हॉस्पीटल, नर्सिंग होम, मेटरनिटी होम, क्लीनिक ,पैथोलैब, एवं डायग्नोस्टिक सेंटर में राज्य के विभिन्न जिलों तथा शासकीय चिकित्सकों के द्वारा सेवायें (ओपीडी) दी जाती हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केशरी ने बताया कि सभी चिकित्सक जो क्लीनिकल स्थापना में सेवायें देते हैं उन्हें अपनी सेवायें देने से पहले अपना नर्सिग होम एक्ट अंतर्गत पंजीयन कराना अनिवार्य है। उन्होंने चिकित्सकों को आयुर्विज्ञान परिषद में पंजीयन(रजिस्ट्रेशन प्रमाण), सेवा देने का समय संबंधी शपथपत्र कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में जमा करने निर्देशित किया है।

उन्होंने क्लीनिकल संस्थाओं को निर्देशित किया है कि उनकी संस्थाओं में सेवायें देने वाले सभी चिकित्सक (शासकीय/निजी) का नर्सिंग होम एक्ट के तहत आवश्यक दस्तावेजों के साथ पंजीयन करावें।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने क्लीनिकल स्थापना संचालकों से कहा है कि नर्सिग होम एक्ट के तहत बिना पंजीकृत चिकित्सकों से सेवायें लेने पर छ.ग.राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम 2010, 22 सिंतबर 2010 के अध्याय तीन के नियम 12 (क)1 के अनुसार रूपये 20 हजार का अर्थदण्ड होगा तथा दूसरी बार उक्त कृत्य दोहराने पर तीन वर्ष तक के कारावास अथवा रूपये 50 हजार का अर्थदण्ड अथवा दोने के भागी होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी आपके स्वयं की होगी। लाइसेंस/अनुमति के ही 5 मार्च से अस्पताल का संचालन कर रहे प्रबंधन पर जुर्माना आरोपित होता भी है या नहीं..?




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