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10, 000 का सिक्का बना मुसीबत प्रत्याशी को निराश होकर लौटना पड़ा, कोरबा विधानसभा का मामला
10, 000 का सिक्का बना मुसीबत प्रत्याशी को निराश होकर लौटना पड़ा, कोरबा विधानसभा का मामला

10, 000 का सिक्का बना मुसीबत प्रत्याशी को निराश होकर लौटना पड़ा, कोरबा विधानसभा का मामला

कोरबा: जिले में विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के आखिरी दिन उस समय अजीबोगरीब मामला सामने आया,जब एक व्यक्ति दो लोगों के साथ कोरबा विधानसभा से नामांकन दाखिल करने कक्ष में प्रवेश किया। वे भारी भरकम बोरी उठाए हुए थे। दरअसल यह बोरी एक, दो, पांच व दस रुपए के सिक्के से भरी थी, जिसे शुल्क जमा करने लाया गया था। हालांकि रिटर्निंग अधिकारी ने एक हजार तक ही सिक्के जमा करने की बात कही। शेष सिक्के जमा करने से इंकार कर दिया।जिससे मायूस शख्स ने सवाल उठाए हैं।

यह पूरा वाकया सोमवार की दोपहर करीब 11.30 बजे की है। दरअसल शहर के तुलसी नगर बस्ती में गणेश दास महंत निवास करता है। वह अपने समर्थक व प्रस्तावक के साथ कोरबा विधानसभा के लिए नामांकन दाखिल करने कलेक्ट्रेट पहुंचा। श्री महंत समर्थक और प्रस्तावक के साथ कक्ष के भीतर पहुंचे तो उनके हाथ में किसी वजनी सामान से भरी प्लास्टिक की बोरी थी। जिसे देख रिटर्निंग अफसर भी थोड़ी देर के लिए चौंक गए। उन्हें माजरा तब समझ आया , जब श्री महंत ने नामांकन पत्र के साथ बतौर शुल्क दस हजार रुपए के सिक्के जमा करने की जानकारी दी। वे बोरी में एक, दो, पांच व दस के सिक्के लेकर पहुंचे थे। सभी सिक्के बकायदा गिनती कर पालीथिन में पैक थे। इस बात की जानकारी होने पर रिटर्निंग अधिकारी ने एक हजार के ही सिक्के जमा करने की बात कही। उन्होंने ने शेष सिक्के लेने से मना कर दिया। जिससे मायूस श्री महंत का कहना है कि वे परिवहन कर्मचारी संघ व ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के अध्यक्ष हैं। वे वाहन चालक सहित इससे जुड़े कर्मचारियों के हित में लंबे समय से काम करते चले आ रहे हैं। उन्हें वाहन चालक साथियों ने अपनी हित के लिए विधानसभा चुनाव लड़ने की सलाह दी थी । इसके लिए साथी चालक और वह खुद बीते चार साल से सिक्के एकत्रित करते आ रहे थे, ताकि नामांकन दाखिल करने के लिए जरूरी शुल्क अदा की जा सके। उनका कहना है कि अफसर ने एक हजार के सिक्के ही जमा करने की बात कही, तो क्या शेष नौ हजार के सिक्के जमा नहीं किया जा सकता था, लेकिन उन्होंने सिक्के लेनें से मना कर दिया। क्या सिक्के पर आरबीआई का प्रतिबंध है या फिर चलन से बाहर हो चुका है। यदि ऐसा है तो फिर एक हजार के सिक्के लेने की बात भी नहीं करनी थी। मेरे द्वारा सिक्के लेने से मना करने पर लिखित में मांग की गई, लेकिन अफसर ने लिखित देने से मना कर दिया । ऐसे में मेरा नामांकन जमा नहीं हो पाने पर प्रशासन जिम्मेदार है। बहरहाल बोरी में सिक्के लेकर नामांकन दाखिल करने पहुंचे शख्स की जमकर चर्चा हो रही है।

 

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