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कोरबा :बिना कोयला जले ही लाल हो गए कुछ लोग ,और तो और इस अदृश्य आग’ ने 4.28 करोड़ से कैसे गर्म हुई चहेते ठेकेदारों की जेब....
PMO, ED, CBI के चौखट में खड़ा है मामला

कोरबा। भारत सरकार के उपक्रम कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के कुसमुंडा क्षेत्र से भ्रष्टाचार का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरटीआई (सूचना का अधिकार) कार्यकर्ता और पत्रकार जितेंद्र कुमार साहू द्वारा निकाली गई जानकारियों ने कुसमुंडा प्रबंधन के शीर्ष अधिकारियों और निजी ठेकेदारों के एक ऐसे संगठित आर्थिक अपराध को बेनकाब किया है, जहां कागजों पर ‘काल्पनिक आग’ दिखाकर सरकारी खजाने से ₹4.27 लाख से अधिक की राशि का गबन कर लिया गया।

👉🏻क्या है पूरा मामला? दो सरकारी विभागों की खुली जंग

आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, कुसमुंडा परियोजना के दो अलग-अलग जिम्मेदार विभागों ने लिखित रूप में जो दावे किए हैं, वे सीधे तौर पर ₹4.28 करोड़ के घोटाले की पुष्टि करते हैं।

👉🏻सिविल विभाग का दावा करोड़ों का खर्च परियोजना अभियंता सिविल, कुसमुंडा परियोजना के पत्र क्रमांक SECL/GM(M)/KSM/C/26/520 दिनांक 27/04/2026 के अनुसार, वर्ष 2020 से 2025 के बीच कोल स्टॉक में आग बुझाने के नाम पर अलग-अलग अवधियों में कुल ₹4,27,96,191/- (चार करोड़ सत्ताईस लाख छियानवे हजार एक सौ नब्बे रुपये) की भारी-भरकम राशि का व्यय दर्शाया गया है।

👉🏻खनन/खान विभाग का दावा शून्य नुकसान इसके ठीक विपरीत, खदान की जमीनी हकीकत का रिकॉर्ड रखने वाले महाप्रबंधक (खनन)/खान प्रबंधक, कुसमुंडा परियोजना ने अपने पत्र क्रमांक Ref.No: SECL/GM(M)/KSM/14 दिनांक 28/04/2026 में लिखित रूप में प्रमाणित किया है कि— वर्ष 2020 से आज दिनांक तक किये गए कोल स्टॉक मेजरमेंट एवं कार्यालय रिकॉर्ड में आग से कोयले की मात्रा में कोई क्षति नहीं पाई गई।”

सबसे बड़ा सवाल जब खान प्रबंधन खुद लिखित में कह रहा है कि 5 वर्षों में आग लगने से एक ग्राम कोयले का भी नुकसान नहीं हुआ, तो सिविल विभाग ने ₹4.28 करोड़ आखिर किस ‘अदृश्य आग’ को बुझाने के लिए फूंक दिए? यह सीधा संकेत है कि फर्जी बिल और फर्जी निविदाएं बनाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है।

👉🏻कागजों पर ‘आग बुझाने’ के नाम पर हुए खर्च का पूरा लेखा-जोखा सिविल विभाग द्वारा जारी किए गए पत्र के अनुसार, निम्नलिखित अवधियों में यह संदिग्ध भुगतान किया गया । दिनांक 01.04.2020 से दिनांक 05.05.2021 तक व्यय राशि 26,89,324.00 , दिनांक

01.04.2022 से दिनांक 31.03.2024 तक व्यय राशि 1,21,02,670.00 दिनांक

19.04.2022 से दिनांक 17.06.2022 तक व्यय राशि 35,40,000.00 दिनांक

20.06.2023 से दिनांक 18.06.2024 तक व्यय राशि 1,12,08,643.00 दिनांक 15.11.2024 से दिनांक 14.11.2025 तक व्यय राशि 27,77,777.00 दिनांक

01.12.2024 से दिनांक 30.11.2025 तक व्यय राशि 1,04,77,777.00 |

कुल योग ₹4,27,96,191.00|

👉🏻पीएमओ, ईडी और सीबीआई की चौखट पर पहुंचा मामला इस महा-घोटाले के अकाट्य और प्रमाणित साक्ष्य मिलने के बाद आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने देश की सर्वोच्च जांच एजेंसियों को आधिकारिक शिकायत भेज दी है। दिनांक 23/06/2026 को डाक के माध्यम से देश की इन शीर्ष संस्थाओं को एफआईआर दर्ज करने हेतु पत्र प्रेषित किया गया है।

प्रधानमंत्री सहित प्रधानमंत्री कार्यालय, नई दिल्ली,निदेशक, प्रवर्तन निदेशालय – मनी लॉन्ड्रिंग की जांच हेतु निदेशक, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो – आपराधिक षड्यंत्र की जांच हेतु केंद्रीय सतर्कता आयुक्त व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय व लोक लेखा समिति को भेजी है।

👉🏻देश की सुरक्षा और राजस्व से खिलवाड़, अब कार्रवाई की बारी

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस संगठित भ्रष्टाचार में संलिप्त SECL कुसमुंडा के संबंधित परियोजना अभियंता सिविल, तत्कालीन महाप्रबंधकों और भ्रष्ट ठेकेदारों के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ और भारतीय न्याय संहिता के तहत तत्काल मामला दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया जाए। साथ ही, पिछले 5 वर्षों के कोल स्टॉक का एक विशेष फॉरेंसिक और फिजिकल ऑडिट कराया जाए ताकि जनता की गाढ़ी कमाई के ₹4.28 करोड़ के फंड ट्रेल का पता लगाकर दोषियों की संपत्तियां कुर्क की जा सकें।

अब देखना यह है कि इतने पुख्ता और ऑन-रिकॉर्ड दस्तावेजों के सामने आने के बाद केंद्रीय कोयला मंत्रालय और शासन-प्रशासन इस गंभीर वित्तीय जालसाजी पर कितनी त्वरित और दंडात्मक कार्रवाई करता है।

 

 

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