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हमेशा की तरह फिर बालको की कार्यशैली पर उठे सवाल,,,,निगम के अधिकारी भी संदेह के दायरे में
हमेशा की तरह फिर बालको की कार्यशैली पर उठे सवाल,,,,निगम के अधिकारी भी संदेह के दायरे में

हमेशा की तरह फिर बालको की कार्यशैली पर उठे सवाल,,,,निगम के अधिकारी भी संदेह के दायरे में

कोरबा। कोई मामूली दुकानदार अगर 8-दस हजार का बकाया देना भूल जाए तो कार्यवाही का कहर टूट पड़ता है। पर वेदांता समूह की कंपनी बालको पर लगभग 7 करोड़ (6 करोड़ 90 लाख) बकाया है और निगम के अफसर सुस्त बैठे सर्दियों में धूप का आनंद लेते देखे जा सकते हैं। बालको ने बिना अनुमति चेक पोस्ट में सीमेंट बैच मिक्सिंग प्लांट एवं हटमेंट स्थापित कर दिया। निगम के भवन अधिकारी ने पहले तो नोटिस-नोटिस खेला गया और फिर तीन दिन में शुल्क देने की चेतवानी देकर मामला डस्ट बिन के हवाले कर दिया गया। इस बात को भी एक साल गुजरने को है और अफसर की सुस्ती का फायदा उठाते हुए बालको कंपनी मौज काट रही है।

इसी साल 31 जनवरी को नगर निगम के भवन अधिकारी अखिलेश शुक्ला ने वार्ड 34 स्थित एक स्ट्रक्चर पर तालाबंदी कर जब्ती की कार्यवाही की थी। सील किया गया स्ट्रक्चर केसीसी इंडिया कॉर्प के नाम पर है, जो वेदांता समूह की कंपनी बालको के अधीन सीमेंट बैच मिक्सिंग प्लांट एवं हटमेंट स्थापित करने के लिए स्थापित किया गया था। पर इसके लिए नगर निगम से अस्थायी रूप से अनुमति की प्रक्रिया अधूरी थी। तालाबंदी के बाद 17 फरवरी में वेदांता के मुख्य महाप्रबंधक को एक नोटिस भी जारी किया गया। पर यह कार्यवाही और नोटिस बालको प्रबंधन पर बेअसर रही। इसके बाद बालको के मुख्य महाप्रबंधक को पुनः 24 फरवरी को एक और नोटिस निकाला गया। इसमें पूर्व में जारी किए जा चुके नोटिस का स्मरण कराते हुए कहा गया है कि अस्थायी रूप से सीमेंट बैच मिक्सिंग प्लांट एवं हटमेंट स्थापित करने की अनुमति प्राप्त करने शुल्क डिमांड पत्र कुल राशि 6 करोड़ 90 लाख 80 हजार 806 रूपए निगम कोरबा कोष में जमा नहीं किया गया है। साथ में यह भी निर्देशित किया गया कि 3 दिवस के भीतर सम्पूर्ण राशि निगम कोष में जमा कराई जाय। अन्यथा राशि जमा न होने पर कंपनी के खिलाफ छत्तीसगढ़ नगर निगम अधिनियम 1956 (संशोधन) विधयेक 2012, एवं छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 (संशोधित अधिनियम) 2015 में दिए गए प्रावधानों के तहत वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। पर हमेशा की तरह नोटिस देकर इतिश्री कर ली गई पर नुकसान नगर निगम को उठाना पड़ रहा है। 

बेधड़क चल रहा बैचिंग प्लांट और शासन को हो रहा नुकसान

तालाबंदी के बाद बालको का वह स्ट्रक्चर बिना अनुमति शुल्क अदा किए कब खुल गया, यह भी एक बड़ा सवाल है। इतना ही नहीं, पिछले एक साल से उसका बेधड़क संचालन भी किया जा रहा है। छह करोड़ 90 लाख बकाया होने के बाद भी बैचिंग प्लांट का संचालन कर नियम कायदे तो दरकिनार किए ही जा रहे, निगम प्रशासन और शासन को भी करोड़ों का नुकसान बर्दाश्त करने विवश होना पड़ रहा है।

कब्जों की भरमार शिकायत, प्रदूषण हद के पार, हादसों में लगातार मौतें

बालको प्रबंधन की मनमानी हमेशा से कोरबा वासियों का जीवन कठिन बनाती रही है। शहर के लोगों की कोरबा से बालको आने जाने में बड़ी समस्या उठानी पड़ती है। यहां तक की जान हथेली पर लेकर इस रास्ते से गुजरना पड़ता है। आए दिन हो रहे सड़क हादसों में लोग घायल हो रहे। बीते एक माह में ही तीन लोगों की जान बेवक्त चली गई। उधर बिना अनुमति के संचालित हो रहें बैचिंग प्लांट के कारण पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है। अवैध कब्जे पर स्थापित बैचिंग प्लांट के निर्माण में अधिकारियों की सांठ गांठ से संचालन किया जा रहा है। भरमार शिकायतों के बावजूद निगम द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। 31 जनवरी को तालाबंद किए जाने के बाद भी अवैध ढंग से ताला खोलकर प्लांट का संचालन संचालन करने वाली कम्पनियां एल एंड टी,  एसीसी इंडिया के ई सी इंटरनेशनल जैसी कंपनियां मौज में हैं।

 

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