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कोरबा। थाना कटघोरा के अपराध क्रमांक 175/26 धारा 318, 3 (5) बी.एन.एस. के अपराध में विवेचना के लिए पुलिस टीम के अधिकारी/कर्मचारी के द्वारा रेंज कार्यालय बिलासपुर से ट्रेन से जाने की दी गई अनुमति का उल्लंघन करते हुए बिना अनुमति के हवाई यात्रा कर पदीय दायित्वों/कर्तव्यों के पालन में गंभीर लापरवाही बरतते हुए स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता की गई। उक्त कृत्य में संलग्न निरीक्षक मोतीलाल पटेल, सहायक उप निरीक्षक राम पाण्डेय, आरक्षक 747 प्रदीप राठौर को पूर्व से एक अन्य प्रकरण में 17 अगस्त 2026 को पुलिस अधीक्षक कोरबा द्वारा निलंबित किया गया है। अतएव, उक्त कृत्य में संलग्न शेष पुलिसकर्मी प्रधान आरक्षक 35 राजेश कँवर, प्रधान आरक्षक 392 गोपाल यादव, आरक्षक 41 सुशील यादव, आरक्षक 08 प्रशांत सिंह को पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय रक्षित केन्द्र, कोरबा नियत किया गया है।
👉🏻 कोरबा से दिल्ली तक हुआ यह घटनाक्रम
कटघोरा थाना का प्रभार संभालने के बाद निरीक्षक मोतीलाल पटेल के द्वारा उक्त प्रकरण के आरोपियों संदीप कालरा व जसमीत सिंह ( जो कि पुलिस के बुलावे पर कटघोरा नहीं आ रहे थे) की गिरफ्तारी के लिए उच्च अधिकारियों से चर्चा की गई। उनके मार्गदर्शन में थाना व साइबर की एक टीम तैयार की गई जिसका नेतृत्व टीआई पटेल द्वारा किया गया। कोई भी टीम निर्धारित किए गए साधन से गंतव्य के लिए रवाना होती है और इस मामले में ट्रेन इनका साधन था। सूत्र के मुताबिक टीम को पुख्ता सूचना मिली थी कि आरोपी विदेश भागने की फिराक में हैं इसलिए ट्रेन से जाना आरोपियों को भागने के लिए अवसर प्रदान करने जैसा साबित हो रहा था। इनकी गिरफ्तारी उपलब्धि से कम न होती। लिहाजा, परिस्थितियों को देखते हुए मौखिक रूप से प्राप्त निर्देश पर टीम हवाई जहाज के जरिए दिल्ली पहुंची। वहां पटेल नगर थाना में टीम ने आमद दी। स्थानीय थाना प्रभारी द्वारा उपलब्ध कराए गए स्टाफ के साथ दोनों आरोपियों के निवास पर दबिश देकर इन्हें घर से गिरफ्तार किया गया। पटेल नगर थाना लाया जाकर आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की गई, फिर चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। दोनों आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लेने के लिए स्थानीय अदालत ले जाया जा रहा था कि पहुंचने से पहले ही मोबाइल की घंटी बज उठी और अर्नेश कुमार के मामले में सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांत का हवाला देकर दोनों आरोपियों को छुड़ा लिया गया। अंततः कोरबा पुलिस दोनों आरोपियों को बुलावे पर उपस्थित होने का नोटिस थमा कर लौट आई। इस बीच हवाई यात्रा की जानकारी होने पर जांच कराई गई,फिर आठ पुलिसकर्मियों का निलंबन हुआ। यह जांच का विषय है कि हवाई यात्रा का खर्च किसी सरकारी मद से किया गया, या फिर अपने खुद के पैसे से? मामले के प्रार्थी ने इस बात से इनकार किया है कि उसके द्वारा पुलिस टीम को दिल्ली भेजने के लिए हवाई यात्रा का खर्चा दिया गया था।
👉🏻 इस न्याय दृष्टांत से बचे आरोपी
न्यायालय सूत्रों के मुताबिक अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसला है, जो यह तय करता है कि 7 साल या उससे कम की सजा वाले मामलों में पुलिस किसी भी आरोपी को सीधे गिरफ्तार नहीं कर सकती। चूंकि BNS की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) में अधिकतम 7 साल की सजा का प्रावधान है, इसलिए इस मामले में अर्नेश कुमार गाइडलाइंस पूरी तरह लागू होती है। कोरबा पुलिस को इस गाइडलाइंस के तहत आरोपियों को कोर्ट में पेश करने से पहले ही छोड़ना पड़ा। उन्हें धारा 35 BNSS’ (पुरानी CrPC 41A) का नोटिस देकर कटघोरा थाना आकर जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया।
👉🏻 …तब न्यायालय से मिलती फटकार
यदि पुलिस ने यह नोटिस दिए बिना ही 7 साल से कम सजा की धारा के मामले में आरोपी को सीधे गिरफ्तार कर लिया, तो वह गिरफ्तारी गैर-कानूनी मानी जाती है और कोर्ट के सामने पेश करते ही आरोपी को रिहा करना पड़ता है।
अर्नेश कुमार जजमेंट के अनुसार, सिर्फ FIR दर्ज होने या अपराध गैर-जमानती होने के आधार पर पुलिस किसी को जेल नहीं भेज सकती। गिरफ्तारी तभी हो सकती है जब आरोपी के भागने का खतरा हो। वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता हो। वह गवाहों को धमका रहा हो। पुलिस को इन वजहों को लिखित (Case Diary) में दर्ज करना होता है। यदि पुलिस कोर्ट (मजिस्ट्रेट) के सामने यह साबित नहीं कर पाती कि गिरफ्तारी क्यों जरूरी थी, तो मजिस्ट्रेट पुलिस को फटकार लगाते हुए आरोपी को तुरंत रिहा करने का आदेश देते हैं। बताया जा रहा है कि मामला हाई प्रोफाइल होने व गिरफ्तारी को लेकर उच्च स्तरीय हलचल मचने के साथ ही अर्नेश गाइडलाइंस के कारण कोरबा पुलिस टीम को बैकफुट होना पड़ा।
👉🏻 अब क्या होगा
मामले में कटघोरा पुलिस जब अपनी जांच पूरी कर लेगी, तो कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करेगी। उस समय दोनों आरोपियों को कोर्ट में मौजूद रहना होगा।
👉🏻 हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक
जुलाई के महीने में कोरबा पुलिस की गिरफ्त से निकलने के बाद दोनों आरोपियों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के संबंध में अधिवक्ता के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत किया। न्यायालय सूत्र बताते हैं कि इनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई है। अब हाईकोर्ट के इसी आदेश के आधार पर निचली अदालत से नियमित जमानत (Regular Bail) औपचारिक रूप से मिलना सम्भावित हो सकता है जो पूरे ट्रायल के दौरान प्रभावी रहेगा।
✍🏻 परिवाद पर आदेश उपरांत थाना में दर्ज है यह FIR
अपराध क्रमांक 175/26 का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है- परिवादी द्वारा जेसीबी इंडिया लिमिटेड की डीलरशिप संचालित करने के लिए वर्ष 2017-18 से छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में भूमि, भवन, शोरूम, सर्विस सेंटर, मशीनरी, फर्नीचर, स्टॉक, डेमो मशीन एवं अन्य मदों में लगभग 50 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। आरोप है कि वर्ष 2022 से जेसीबी इंडिया लिमिटेड के अधिकारी संदीप कालरा एवं जसमित सिंह, कार्यालय जेसीबी इंडिया लिमिटेड, 23/7 मथुरा रोड, बल्लभगढ़, हरियाणा-121004, द्वारा डीलरशिप के नवीनीकरण/एक्सटेंशन के नाम पर उस पर अनुचित दबाव बनाया गया तथा अवैध आर्थिक मांगें पूरी नहीं करने पर डीलरशिप समाप्त करने की धमकी दी जाती रही।
वर्ष 2021-22 के बाद डीलरशिप अनुबंध लगातार असामान्य रूप से कम अवधि के लिए किए गए। दिनांक 12.09.2023 को जेसीबी कंपनी के कार्यालय में परिवादी संस्था के निदेशक राजा मोदी के साथ कथित रूप से अभद्र एवं अपमानजनक व्यवहार किया गया। घटना के बाद कंपनी की ओर से ई-मेल के माध्यम से क्षमा मांगे जाने का भी उल्लेख है।
दिनांक 22.01.2025 की बैठक में डीलरशिप को 31.12.2025 तक बढ़ाने तथा आगे भी जारी रखने पर सहमति बनी थी। आरोप है कि इसी दौरान राजा मोदी से एग्रीमेंट के नाम पर हस्ताक्षर करा लिए गए, जबकि वास्तविक एग्रीमेंट उस समय प्रस्तुत नहीं किया गया था। बाद में अक्टूबर 2025 में उपलब्ध कराए गए एग्रीमेंट में 31.12.2025 के बाद डीलरशिप के नवीनीकरण का प्रावधान नहीं था। परिवादी ने आरोप लगाया कि उसकी जानकारी एवं सहमति के बिना एग्रीमेंट की शर्तों में परिवर्तन/कूटरचना की गई।
दिनांक 31.10.2025 को जेसीबी कंपनी द्वारा ई-मेल के माध्यम से परिवादी को सूचित किया गया कि उसकी डीलरशिप 31.12.2025 को समाप्त कर दी जाएगी। ई-मेल में लक्ष्य एवं निर्धारित मापदंड पूरा नहीं करने का सामान्य उल्लेख किया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन-सा लक्ष्य अथवा मापदंड पूरा नहीं किया गया था।
न्यायालय द्वारा परिवाद एवं दस्तावेजों के अवलोकन में डीलरशिप अनुबंधों की अवधि में बार-बार परिवर्तन, अलग-अलग Minutes of Meeting में अंतर तथा हस्ताक्षरों की स्थिति को महत्वपूर्ण माना गया। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि उपलब्ध घटनाक्रम एवं दस्तावेजों से परिवादी को दीर्घकालीन लाभ का आश्वासन देकर भारी निवेश कराया जाना तथा बाद में डीलरशिप समाप्त किया जाना छल की ओर संकेत करता है। Minutes of Meeting में भी परिवादी के साथ छल किए जाने के तथ्य प्रथम दृष्टया परिलक्षित होना पाया गया।
न्यायालय ने उपलब्ध दस्तावेजों एवं घटनाक्रम के आधार पर संदीप कालरा एवं जसमित सिंह के विरुद्ध धारा 318/3(5) बीएनएस के अंतर्गत अपराध प्रथम दृष्टया बनना पाया। इस तरह न्यायालय ने थाना कटघोरा को परिवादी के आवेदन पर आरोपी संदीप कालरा एवं जसमित सिंह के विरुद्ध धारा 318, 3(5) बीएनएस के तहत एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने तथा विवेचना उपरांत प्रतिवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया। इसके आधार पर 22 मई 2026 को कटघोरा थाना में जुर्म दर्ज कर विवेचना में लिया गया। विवेचक एएसआई राम पांडेय थे।
