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BALCO प्रबंधन की तानाशाही फिर आई सामने, गेट जाम कर प्रदर्शन कर रहे भीड़ पर लाठीचार्ज, Balco गेट पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात
BALCO प्रबंधन की तानाशाही फिर आई सामने, गेट जाम कर प्रदर्शन कर रहे भीड़ पर लाठीचार्ज, Balco गेट पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात

BALCO प्रबंधन की तानाशाही फिर आई सामने, गेट जाम कर प्रदर्शन कर रहे भीड़ पर लाठीचार्ज, Balco गेट पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात

कोरबा: Balco की दमनकारी नीति से वैसे तो सभी वाकिफ है। श्रमिकों के हित में जब भी आवाज बुलंद की जाती है बालको हमेशा बल का प्रयोग करवाता है । एक बार फिर बालको में पुलिस के अधिकारियों ने लाठीचार्ज किया है। लाठीचार्ज के दौरान मौके पर कार्यपालन दंडाधिकारी मौजूद थे, बताया जा रहा है कि बालको श्रमिकों का संयुक्त यूनियन पिछले कुछ समय से वेतन वृद्धि, काम से निकाले गए कर्मियों को वापस लेने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा था। वैसे तो आंदोलन को लीड बीएमएस कर रही थी जिसके बाद वार्ता के लिए 5 जनवरी का दिन भी मुकर्रर किया गया था।

लेकिन इसी बीच कुछ श्रमिक नेताओं ने आंदोलन को हाइजेक करते तत्काल वार्ता की मांग को लेकर आज वापस से प्रदर्शन शुरू कर दिया लेकिन इसके लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। पहले भीड़ सीईओ के बंगले का घेराव करने निकल पड़ी जिसको पुलिस ने समझाइश देकर वापस भेज दिया बाद में पहले परसभाटा चौक और उसके बाद बालको मेन गेट को जाम कर ताला लगा दिया गया।

यहां न तो किसी को अंदर जाने दिया जा रहा था न ही किसी को बालको प्लांट से बाहर आने दिया जा रहा था। पुलिस और प्रशासन ने यहां भी काफी देर तक समझाइश देने का प्रयास किया लेकिन जब प्रदर्शनकारी इसके बाद भी मौके से नहीं उठे तो कार्यपालिक दंडाधिकारी मनीष साहू ने अंतिम चेतावनी दी फिर भी असर न होता देख पुलिस ने बल प्रयोग करते लाठी चार्ज कर दिया।

आरोप हैं कि इस दौरान प्रदर्शनकारी गाली भी दे रहे थे। इधर बालकोनगर पुलिस ने प्रबंधन की ओर से की गई शिकायत पर अपराध दर्ज करते मामले की जांच शुरू कर दी है। भले ही प्रदर्शनकारियों का मुद्दा सही हो लेकिन गलत तरीके से किए गए आंदोलन को लेकर अब मुद्दा अपनी राह से भटकता दिखाई दे रहा है ।

बता दे की बालकों का रवैया भी हमेशा से ही श्रमिकों के प्रति दमनकारी रहा है । नए साल की शुरुआत होने के साथ ही जिस तरह से बालकों के आश्रय पुलिस ने पर श्रमिकों के ऊपर लाठी चार्ज किया गया है ।वह निश्चित तौर पर श्रमिकों को दबाने का प्रयास था । वही नए-नए श्रम मंत्री बने लखन लाल देवांगन की गृह जिले में इस तरह के मामले सामने आने के बाद उनकी भी कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगा लाजमी है।

 

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