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कोरबा के बहुचर्चित आरामशीन मुख्य मार्ग पर सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त और अवैध निर्माण के मामले में प्रशासन की जांच रिपोर्ट ने सनसनीखेज मुहर लगा दी है। कलेक्टर जनदर्शन में की गई शिकायत के बाद तहसीलदार न्यायालय द्वारा कराई गई जांच में यह आधिकारिक रूप से सिद्ध हो गया है कि जिस जमीन पर कब्जा कर निर्माण किया जा रहा था, वह पूर्णतः शासकीय भूमि है।
पटवारी के जांच प्रतिवेदन के आधार पर तहसीलदार न्यायालय कोरबा ने मामले में विधिवत प्रकरण दर्ज कर अनावेदक को नोटिस जारी आहूत कर दिया है।
तहसीलदार की ‘रेवेन्यू ऑर्डर शीट’ से खुले बड़े राज शिकायतकर्ता द्वारा जनदर्शन टोकन क्रमांक 2050126001660 के माध्यम से की गई शिकायत पर हल्का पटवारी से जांच प्रतिवेदन मंगाया गया था। न्यायालय तहसीलदार कोरबा के राजस्व आदेश पत्र अनुसार जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि विवादित स्थल खसरा नंबर 235 का हिस्सा है, जो कि राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय भूमि दर्ज है।
शासकीय भूमि में से पूर्व में रकवीर पिता महेन्द्र सिंह को वर्ष 2003 में मात्र 360 वर्ग फीट का पट्टा आबंटित किया गया था। रकवीर सिंह द्वारा 22 अप्रैल 2025 को नियमों को ताक पर रखकर मोमिना बेगम पति अब्दुल नसीम मंसूरी को नोटराइज्ड इकरारनामे के जरिए मलबा सहित जमीन बेच दी गई। मौके पर पट्टे की सीमा से कई गुना अधिक यानी कुल 1935 वर्ग फीट शासकीय भूमि घेरकर पक्का निर्माण कराया जा रहा था।
तहसीलदार कोरबा द्वारा दिए गए आदेश में पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर अनावेदक मोमिना बेगम के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें तलब किया गया है।
शासकीय रिकॉर्ड में यह पुख्ता हो जाने के बाद कि बेशकीमती सरकारी भूमि को अवैध इकरारनामे के जरिए खुर्द-बुर्द कर 1935 वर्ग फीट पर पक्का निर्माण खड़ा किया जा रहा था l
जब भूमि का शासकीय होना और अवैध अंतरण प्रमाणित हो चुका है,तो क्या नगर पालिक निगम और राजस्व अमला केवल नोटिस-नोटिस खेलेंगे या इस अवैध ढांचे पर बुलडोजर चलाकर सरकारी जमीन को मुक्त कराएंगे?
सरकारी पट्टे को अवैध रूप से नोटरी के जरिए बेचने और खरीदने वाले सिंडिकेट पर दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई कब होगी?
कलेक्टर जनदर्शन की साख अब इस बात पर टिकी है कि करोड़ों की इस शासकीय जमीन को बेदखल कर दोषियों पर नजीर बनने वाली कार्रवाई की जाती है या मामला कागजी कार्रवाई में ही उलझा रहेगा।
