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कोरबा में अडानी के प्रस्तावित पावर प्लांट पर बवाल,27 फरवरी की जनसुनवाई से पहले विरोध तेज, 1600 मेगावाट नई परियोजना पर उठे गंभीर सवाल
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जिले में Adani Power के प्रस्तावित नए कोयला आधारित पावर प्लांट को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। 27 फरवरी 2026 को सरगबुंदिया में आयोजित होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले ही परियोजना पर सवालों की बौछार शुरू हो गई है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कोरबा शहर के आसपास किसी भी नए कोयला आधारित संयंत्र की स्थापना का कड़ा विरोध करते हुए जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की है।

 

जानकारी के अनुसार, Korba Power Limited द्वारा सरगबुंदिया, खोड्डल और पताडी गांवों में 1320 मेगावाट के विस्तार और अतिरिक्त 1600 मेगावाट के नए विद्युत संयंत्र की स्थापना का प्रस्ताव है। इसी सिलसिले में 27 फरवरी को पर्यावरण जनसुनवाई निर्धारित की गई है।

 

पुराने वादों पर सवाल, फिर नया विस्तार क्यों?

 

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि पूर्व में Lanco Infratech Limited की परियोजना के दौरान किए गए कई वादे अधूरे रह गए। न तो व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण हुआ, न ही राख (फ्लाई ऐश) प्रबंधन की व्यवस्था संतोषजनक रही और न ही प्रभावित गांवों के बुनियादी ढांचे का अपेक्षित विकास हो सका। ऐसे में उसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नया संयंत्र स्थापित करना जनहित के खिलाफ बताया जा रहा है।

 

पहले से बोझ झेल रहा है कोरबा

 

कोरबा पहले ही कई बड़े ताप विद्युत संयंत्रों से घिरा हुआ है। शहर के चारों ओर NTPC Limited, Chhattisgarh State Power Generation Company Limited, Bharat Aluminium Company समेत अन्य निजी कंपनियों के कोयला आधारित संयंत्र संचालित हैं। करीब 4500 मेगावाट क्षमता वाले इन संयंत्रों और आसपास की कोयला खदानों के कारण शहर का पर्यावरणीय संतुलन पहले ही प्रभावित हो चुका है।

 

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर खतरे की आशंका

 

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि वायु एवं ध्वनि प्रदूषण का असर आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई दे रहा है। सांस संबंधी बीमारियां, त्वचा रोग और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में अतिरिक्त 1600 मेगावाट का नया संयंत्र कोरबा के लिए और अधिक घातक साबित हो सकता है।

 

ईआईए रिपोर्ट पर भी उठे सवाल

 

कंपनी की पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। आरोप है कि रिपोर्ट में संरक्षित वन क्षेत्र, पर्वतीय भूभाग, जनसंख्या आंकड़े, जलीय संतुलन, जीव-जंतुओं की स्थिति और पूर्व प्रदूषण स्तर से जुड़े संवेदनशील तथ्यों को पूरी पारदर्शिता से प्रस्तुत नहीं किया गया।

 

विरोधकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण मंडल और जिला प्रशासन से जनसुनवाई को तत्काल निरस्त कर स्वतंत्र एवं वैधानिक जांच कराने की मांग की है।

 

अब निगाहें 27 फरवरी को प्रस्तावित जनसुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि परियोजना को हरी झंडी मिलती है या जनआवाज के दबाव में प्रशासन कोई बड़ा निर्णय लेता है।

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