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फिर हुआ चावल का खेला: कोरबा और कटघोरा नान गोदाम में हजारों क्विंटल घटिया चावल के किये लाट पास, राज्य स्तरीय समिति की जांच शुरू*इनकी है प्रमुख भूमिका...
किस किस पर गिरेगी गाज

कोरबा:-* राज्य नागरिक आपूर्ती निगम के कोरबा और कटघोरा गोदाम में हजारों क्विंटल घटिया चावल लेने के मामले में राज्य स्तर की समिति ने जांच शुरू कर दी है। मुख्यालय के अफसरों की जांच समिति ने शुरुआती निरीक्षण किया है। विस्तृत जांच के बाद ही इस मामले में कई बड़े अधिकारी लपेटे में आ सकते है। अन्य जिले के तकनीकी कर्मचारियों की आईडी, पासवर्ड का उपयोग कर चावल का लाट स्वीकार कर भ्रष्ट्राचार करने के मामले में संबंधित जिलों के जिला प्रबंधकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। इस मामले में नान मुख्यालय की जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। नान के गोदाम सीएमआर का घटिया चावल लेने के मामले में 8 से ज्यादा कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके बावजूद दो जिलों में जिला प्रबंधकों की भूमिका को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नही हो पाई है। कोरबा जिला प्रबंधक को सिर्फ नोटिस ही जारी किया गया है। जिला प्रबंधकों ने बिना गुणवत्ता निरीक्षक के ही घटिया चावल के लाट पास करा दिए। सूत्र दावा करते है कि इस मामले में मुख्यालय के कुछ अफसरों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। दरअसल कोरबा जिले में पदस्थ नियमित तकनीकी कर्मचारी से केवल एक लाट ही पास कराया गया। जबकि एक तकनीकी कर्मी एक दिन में अधिकतम 15 लाट पास कर सकता है। मुख्यालय में यह भी चर्चा का विषय है कि एक अनियमित अधिकारी जिसकी विभागीय जांच चल रही है, उसे जिले में कैसे जिम्मेदारी दी दी गई। वहीं दूसरे जिले में जिला प्रबंधक ने बिना किसी लिखित आदेश के कर्मचारी की आईडी कैसे स्थानांतरित करा दी। इधर मुख्यालय से राज्य स्तर की जांच समिति में उपमहाप्रबंधक और एक तकनीकी अधिकारी को शामिल किया गया है। जांच के बाद भ्रष्ट्राचार के इस मामले में कई चौकाने वाले तथ्य सामने आने के दावे भी किये जा रहे है।

 

*सैंपलों की जांच एफएसएसएआई को*

 

नान ने कोरबा और कटघोरा गोदाम के चावल सैंपल की जांच करने एफएसएसएआई को भेजा है जो चावल खरीदी के मापदंड से अलग है। जबकि इसे भारत सरकार के केंद्रीय अनाज विश्लेषण प्रयोगशाला में भेजा जाना था।

 

*बिना लिखित आदेश के आईडी ट्रांसफर नही*

 

आईडी ट्रांसफर करने के लिए नान के अपने नियम है। गुणवत्ता निरीक्षक को जिस जिले में पदस्थ किया जाता है, वही चावल की गुणवत्ता जांच कर पेपर तैयार करता है। मुख्यालय में लिखित आदेश के बिना कोई भी क्वालिटी इंस्पेक्टर दूसरे जिले में लाट का पेपर नही बना सकता और ना ही आईडी ट्रांसफर कर सकता है।

 

*सरकारी राशन दुकानों में घटिया चावल सप्लाई मामले में प्रसारित की गई थी खबर*

 

नान गोदाम से जिले के सरकारी राशन दुकानों में घटिया चावल सप्लाई को लेकर गत माह अनेकों खबरे प्रसारित की गई थी और जानवर न खाने लायक चावल का गरीबो को वितरण किये जाने के मामले को जिला प्रशासन के संज्ञान में लाया गया था, लेकिन तब इस मामले में किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई देखने- सुनने को नही मिली थी। संबंधितों की मिलीभगत से जिले के गरीबो को गुणवत्ताहीन अनाज वितरण किया जा रहा है, लेकिन एक कहावत है न कि देर है- अंधेर नही...! कुछ इसी तर्ज पर शासन ने घटिया चावल वितरण के इस गंभीर मामले को संज्ञान में तो लिया। आगे देखने वाली बात होगी कि इस भ्रष्ट्राचार मामले में गाज किस- किस पर गिरती है?

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